20 May, 2009

बेचैन चील

बेचैन चील!!
प्यासा-प्यासा,
देखता रहूँगा एक दमकती हुई झील
या पानी का कोरा झाँसा
जिसकी सफ़ेद उस जैसा मैं पर्यटनशीलचिलचिलाहटों में है अजीब
इनकार एक सूना!

9 comments:

  1. अरे भाई मुक्तिबोध को नेट पर लाने का शुक्रिया.

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  2. रंगनाथ, आपने मुक्तिबोध पर केंद्रित ब्‍लॉग शुरू करके अच्‍छा कदम उठाया है। ब्‍लॉग के कंटेंट के साथ ही फार्म पर भी ध्‍यान दें और इसे आकर्षक भी बनाएं तो और भी अच्‍छा रहेगा। शुभकामनाएं।

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  3. हुज़ूर आपका भी .......एहतिराम करता चलूं .....
    इधर से गुज़रा था- सोचा- सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ

    कृपया एक अत्यंत-आवश्यक समसामयिक व्यंग्य को पूरा करने में मेरी मदद करें। मेरा पता है:-
    www.samwaadghar.blogspot.com
    शुभकामनाओं सहित
    संजय ग्रोवर

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  4. आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . लिखते रहिये
    चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है

    गार्गी

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  5. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  6. आप सभी को मेरी हिम्मत बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद

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  7. सुंदर सुंदर सुंदर...बेचैन चील!!

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  8. आज आपका ब्लॉग देखा.... बहुत अच्छा लगा. मेरी कामना है कि आपके शब्दों को नये अर्थ, नयी ऊंचाइयां एयर नयी ऊर्जा मिले जिससे वे जन-सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति का सार्थक माध्यम बन सकें.
    कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर पधारें-
    http://www.hindi-nikash.blogspot.com

    सादर-
    आनंदकृष्ण, जबलपुर

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