15 August, 2009

ऐ इन्सानों

आंधी के झूले पर झूलो
आग बबूला बन कर फूलो
कुरबानी करने को झूमो
लाल सबेरे का मूँह चूमो
ऐ इन्सानों ओस न चाटो
अपने हाथों पर्वत काटो

पथ की नदियाँ खींच निकालो
जीवन पीकर प्यास बुझालो
रोटी तुमको राम न देगा
वेद तुम्हारा काम न देगा
जो रोटी का युद्ध करेगा
वह रोटी को आप वरेगा ।

2 comments:

  1. शानदार रचना है भाई। स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई।

    ReplyDelete
  2. मेरे ब्‍लॉग 'शब्‍दों की दुनिया' की बायीं बाजूपट्टी में यह गीत है। मौका मिले तो सुनिएगा...

    ReplyDelete