13 November, 2009

मुक्तिबोध को हार्दिक श्रद्धां‍जलि



मुक्तिबोध की कविताएं,कहानियाँ,लेख,निबंध सभी ने हिन्दी को व्यापक स्तर पर प्रभावित किया है। कवि के रूप में उन्हें सर्वाधिक लोकप्रियता मिली। मुक्तिबोध हिन्दी कविता में एक अवधारणा बन चुके हैं। अपने समकालीन और परवर्ती पीढ़ियों को समान रूप से प्रभावित करने में कम ही कवि सफल हो पाते हैं। मुक्तिबोध ऐसे ही विरले कवियों में से एक हैं। मुक्तिबोध विगत कई दशकों से हिन्दी आलोचना के केन्द्र में हैं। उनकी कविताओं से गुजरे बिना हिन्दी साहित्य की कोई यात्रा पूरी नहीं होती। हिन्दी की प्रगतिशील कहे जाने वाली काव्य-धारा की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक उपलब्धि मुक्तिबोध की कविताएं हैं। मुक्तिबोध की कविताएं उन विलक्षण कविताओं में से हैं जिन्हें आत्मसात करना एक सर्वथा नए व्यक्तित्व को धारण करना है। मुक्तिबोध की कविताएं आपको सहज नहीं रहने देती। बेकल करती हैं। सुविधावाद का उनसे जन्मजात वैर है। ऐसी शक्तिशाली कविताएं लिखने वाले महान कवि का हिन्दी समाज सदैव श्रृणी रहेगा।

अभी तक मुक्तिबोध की आलोचना और कहानियों का उचित आलोचनात्मक मूल्यांकन नहीं हो सका है। मुक्तिबोध के जन्मदिन पर यह ध्यान करना सुखद है कि कुछ युवा शोधार्थियों ने मुक्तिबोध की पत्र,कहानियों और आलोचना पर नए सिरे से ध्यान देना शुरू किया है। उम्मीद है इस दिशा में होने वाली प्रगति हिन्दी साहित्य में मुक्तिबोध के मुल्यांकन की नई दिशा प्रशस्त करेगी। इन्हीं शब्दों के साथ इस कालजयी रचनाकार को उसके जन्मदिन के अवसर पर हार्दिक श्रद्धां‍जलि।

4 comments:

  1. श्रद्धांजली।

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  2. मुक्तिबोध अमर रहे।

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  3. ऐसे समय में मुक्तिबोध होना जिगर की बात है।

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